MBRC

J GIrI
J GIrI, 30
Bekar
Benim hakkımda:
jUst gIrL hErE 4 cHaT

वह जो अब कहीं नहीं है!!! उसपे भी तोह यकीन नहीं है
रहता है जो फलक फलक पे, उसका घर भी ज़मीन नहीं है

अक्कल का ख्याल हो अगर, शकल से भी हसीं नहीं है
पहले हर जगह था वह, सुना है अब वह कहीं नहीं है !!!